भारतीय संविधान: अनुच्छेद 370 एवं 35ए का ऐतिहासिक, संवैधानिक और सामाजिक विश्लेषण: एक अध्ययन
Keywords:
भारतीय संविधान, अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35ए, जम्मू-कश्मीर, राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक विश्लेषण, सामाजिक प्रभाव, अध्ययनAbstract
15 अगस्त 1947 को भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की तथा 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ तथा इसी के सन्दर्भ में भारतीय संविधान के अन्तर्गत अनुच्छेद 370 एवं 35ए ने जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता प्रदान की थी। अनुच्छेद 370 के तहत, राज्य को भारतीय संविधान के अन्य प्रावधानों को लागू करने से छूट दी गई थी, जबकि अनुच्छेद 35ए ने राज्य सरकार को ‘स्थायी निवासियों’ के अधिकारों को परिभाषित करने की शक्ति दी तथा जो यह प्रावधान किए गए थे इनका उद्देश्य भारत और जम्मू-कश्मीर के बीच संबंधों को स्थिरता प्रदान करना था। हालाॅकि, समय के साथ, इन अनुच्छेदों पर आलोचना हुई कि वे भारत की संघीय संरचना एवं समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) के सिद्धाँत के विपरीत है। भारत सरकार के द्वारा 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 एवं 35ए का निरस्तीकरण कर दिया गया एवं जम्मू एवं कश्मीर दो केन्द्र शासित प्रदेशों में इसको विभाजित कर दिया गया। जिसमें जम्मू-कश्मीर की अपनी विधानसभा होगी तथा लद्दाख बिना विधानसभा के केन्द्र शासित प्रदेश होगा तथा प्रस्तुत शोध पत्र अनुच्छेद 370 एवं 35ए के ऐतिहासिक, संवैधानिक एवं सामाजिक पहलूओं का विश्लेषण करता है। इसमें इन प्रावधानों की उत्पत्ति, उनके प्रभाव और 2019 के उपरान्त जम्मू एवं कश्मीर में हुए परिवर्तनों का अध्ययन किया गया है तथा इस शोध पत्र के निहितार्थ भारत की संघीय संरचना, सामाजिक न्याय तथा राष्ट्रीय एकता पर इन निर्णयों के प्रभावों को समझने का प्रयास इसके सन्दर्भ में करता है।


