गुटनिरपेक्षता और विकासशील विश्व के नेतृत्व में भारत की भूमिकाः एक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.56614/eiprmj.v15i2.962Keywords:
गुटनिरपेक्षता, गुटनिरपेक्ष आंदोलन, भारत, विकासशील विश्व, विदेश नीति, विश्व शांति, वैश्विक दक्षिण, रणनीतिक स्वायत्तता।Abstract
गुटनिरपेक्षता भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण आधार रही है, जिसने शीत युद्ध के दौर में भारत को दोनों महाशक्तियों-संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के सैन्य गुटों से दूर रहकर स्वतंत्र एवं संतुलित विदेश नीति अपना ने का अवसर प्रदान किया। गुटनिरपेक्ष आंदोलन का उद्देश्य केवल किसी सैन्य गुट में शामिल न होना नहीं था, बल्कि विश्व शांति, उपनिवेशवाद का विरोध, नस्लभेद का उन्मूलन, निरस्त्रीकरण, संप्रभु समानता तथा विकासशील देशों के राजनीतिक एवं आर्थिक हितों की रक्षा करना भी था। भारत ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में इस आंदोलन की स्थापना एवं विकास में अग्रणी भूमिका निभाई और एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिका के नवस्वतंत्र देशों को एक साझा मंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


